Pasand

Friday, 16 November 2012

कसक ....

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यूं तो हूँ मैं तुमसे जन्मी हूँ माँ  मगर तुमने मुझे कभी अपना समझा ही नहीं माँ  क्या सिर्फ इसलिए कि मैं एक लड़की थी  या मेरा रंग ज़रा ...
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Monday, 5 November 2012

सफर ज़िंदगी का ....

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एक लंबी सड़क सी ज़िंदगी  एक ऐसी सड़क  जिसे तलाश है अपनी मंज़िल की  वो सड़क जिसे अपने आप में ऐसा लगता है कि  कभी तो खत्म हो...
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Friday, 5 October 2012

बदलाव

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कभी कहीं पढ़ा था कि बारिश में इन्द्र धनुष के रंग ही तो बरसते है वरना यूं तो सारी धरती रंग हीन ही नज़र आती है सच ही तो है, ज़िंदगी का ...
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Wednesday, 26 September 2012

यादों की इमारत

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यूं तो आज तुमसे मिले बिछड़े कई साल होने को आए  मगर आज भी ऐसा लगता है  जैसे आज की ही बात हो  यूं होने को तो बात तुमसे आज भी होती है, ...
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Friday, 14 September 2012

चाहत

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यूं तो ज़िंदगी ने बहुत कुछ दिया है हमें  इसलिए तो आज सभी ने दिलोजान से चाहा है हमें   यह मेरी ज़िंदगी का दिया हुआ कोई तौहफा ही है जो आज    ...
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Monday, 3 September 2012

प्यार का एक गीत...

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सागर किनारे साहिल की रेत पर  न जाने कितनी बार लिखा मैंने तुम्हारा नाम  मगर हर बार उसे कोई न कोई सगार की लहर आकर मिटा गयी  मगर मैंने हार ना ...
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Wednesday, 22 August 2012

सूर्यास्त और मेरा मन...

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कभी यूं भी होता है कि  अक्सर किसी नदी किनारे शाम के वक्त उस नदी के निर्मल जल में पैरों को डालकर बैठना मुझे बहुत अच्छा लगता है न सिर्फ बैठना...
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Thursday, 12 July 2012

ख़्यालों की दुनियाँ ...

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दिन भर की भागा दौड़ी और किसी न किसी काम में उलझे रहने के कारण  जब रात को थक कर जा लेटता है यह शरीर  तब अक्सर वो मन के जागने का समय होता है ...
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Tuesday, 3 July 2012

क्या है पहचान एक औरत की "सागर या धरती"....?

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कब तक तुम अपनी चाहत का वास्ता दे-देकर अपने प्यार का यह रंग चढ़ाते रहोगे मुझ पर...कब तक ? आखिर क्यूँ, किस लिए दिखाते हो तुम मुझे अपने प्यार ...
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Tuesday, 26 June 2012

ज़रा सोच ओ बंदे ...

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यूं तो ज़िंदगी हर लम्हा, हर पल करवटें बदलती ही रहती है   जिसकी एक करवट कभी रातों का जागरण दे जाती है  तो कभी उस ही ज़िंदगी की दूसरी करवट पर...
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Wednesday, 20 June 2012

उम्मीद...

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सुबह की पहली किरण के मेरे कक्ष में पदार्पण के साथ ही उदय होता है  मेरी उम्मीदों का सूरज भी मेरे मन के किसी कोने में कहीं  उस पर दूर मंदिर स...
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Wednesday, 13 June 2012

इश्क़ बनाम दिमाग का लोचा ...

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कितना कुछ छुपा है न इस एक शब्द में, नहीं ? कहने को नफरत को भी प्यार से जीता जा सकता है इसलिए शायद यह कहावत बनी होगी कि, "प्यार और जंग ...
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Friday, 25 May 2012

चाँद से बातें ....

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मन में बसे समंदर के साहिल की रेत पर जब कुछ बातें कुछ यादें दस्तक दे जाती है तो अक्सर मन उदास हो जाता है और क्यूँ न हो  आखिर उदासी भी तो कभी-...
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Sunday, 29 April 2012

ज़िंदगी

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ज़िंदगी एक ऐसा शब्द जिसके हर नज़र में एक अलग ही मायने है  कोई कहता है ज़िंदगी एक किताब है  तो कोई कहता है बारिश का पानी  कोई कहता है आग का ...
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Friday, 30 March 2012

प्रकृति और साथ ज़िंदगी का ....

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कभी सोचा है प्रकृति और इंसान के साथ के गहरे रहस्य को जैसे एक ही सिक्के के दो पहलुओं सा साथ  एक के बिना दूजा अधूरा जैसे मन के भाव वैसा प्रकृ...
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Tuesday, 27 March 2012

अपना घर

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जानते हो तुम्हारे घर से जाने के बाद  मुझे घर कितना सुना और खाली-खाली सा लगने लगता है   यूं तो मैं कहने को अक्सर कह दिया करती हूँ  कि यही तो...
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Friday, 23 March 2012

रिश्तों में नाम ज़रूरी है क्या ?

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माना के रिश्ता था कभी हमारे बीच प्यार का मगर क्या सच में वो प्यार ही था  या हम उसे प्यार समझ बैठे थे   मगर आज ज़िंदगी के जिस मोड पर खड़े हम...
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Wednesday, 21 March 2012

है कोई जवाब ?

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कहते हैं खुशी बांटने से बढ़ती है और ग़म बाटने से घटता है यह भी कहा जाता है कि अति हर चीज़ कि बुरी होती है फिर चाहे वो प्यार ही क्यूँ न हो...
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Sunday, 18 March 2012

जीवन क्या है ? जीवन या एक पहेली....

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 एक बेहतरीन लेखिका के एक ब्लॉग को पढ़कर मेरे मन में उठे कुछ विचार  गहराइयों मे जाकर भी सोचा है कभी कि यह जीवन क्या है ? समझ ही नहीं आता कि...
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Tuesday, 6 March 2012

ज़िंदगी के रंग...

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कुछ भी शुरू करने से पहले आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनायें दोस्तों  होली के रंग अपनों के संग बस रंग ही रंग कभी सोचा है  अगर ज़िंदगी में...
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Pallavi saxena
मैं भोपाल की रहने वाली हूँ। मैंने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा भोपाल में ही प्राप्त की। भोपाल के नूतन कालेज से बी.ए एवं अँग्रेज़ी साहित्य में एम.ए किया। एक साधारण सी गृहणी, 7 वर्ष लंदन में रहने के बाद 2014 में फिर अपने वतन भारत(पुणे) वापस आई हूँ। हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक श्री मुंशी प्रेमचंद को बहुत पसंद करती हूँ। उनके लेखन की सरल भाषा को ध्यान में रखकर, उनसे प्रेरित होकर ही मैं अपने ब्लॉग की भाषा को भी सरल बनाकर लिखने का प्रयास करती हूँ, ताकि मेरे ब्लॉग को हर आयु, वर्ग का व्यक्ति आसानी से समझ सके। अपने इस ब्‍लॉग में मैं अपने जीवन के अनुभव प्रस्‍तुत कर रही हूँ।
Garbhanal
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