Pasand

Saturday, 25 May 2013

ज़िंदगी की सारी खुशियाँ जैसे मौन हो कर रह गयी...

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ज़िंदगी की सारी खुशियाँ जैसे मौन हो कर रह गयी वो छोटे-छोटे खुशनुमा पल वो गरमियों की छुट्टियों में चंगे अष्टे खेलना वो रातों को सितारों क...
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Tuesday, 12 March 2013

बारिश और मैं ....

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आज क्या लिखूँ कि मन उलझा-उलझा सा है रास्ते पर चलते हुए जब छतरी के ऊपर गिरती पानी की बूँदें शोर मचाती है तो कभी उस शोर को सुन मन मयूर मचल उठ...
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Saturday, 9 March 2013

नारी मन....

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यूं तो कहने को महिला दिवस है लेकिन क्या फायदा ऐसे दिवस का जो महज़ कहने को आता है और आकर यूं ही चला जाता है ना नारी ही नारी का सम...
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Tuesday, 29 January 2013

न जाने माँ इतनी हिम्मत हर रोज़ कहाँ से लाती है....

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न जाने माँ इतनी हिम्मत रोज़ कहाँ से लाती है के हों कितने ही गम पर वो सदा मुसकुराती है हर रोज़ कड़ी धूप के बाद चूल्हे की आग में तपती  है ...
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Sunday, 20 January 2013

लो बीत गया फिर, एक और साल ....

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लो हर बार की तरह बीत गया एक और साल, फिर एक बार आया है नया साल  मगर  कुछ भी तो नहीं बदला मेरी ज़िंदगी में, नया जैसा तो कुछ हुआ ही नही...
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Saturday, 5 January 2013

रेत सा रिश्ता ...

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क्यूँ रिश्ता मुझसे अपना तुमने रेत सा बनाया  क्यूँ आते हो तुम लौट-लौटकर मेरी ज़िंदगी में गये मौसम की तरह  जानते हो ना, कभी-कभी खुश ग...
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Friday, 14 December 2012

एहसास

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कभी कभी यह ज़िंदगी इतनी तन्हा लगती है की जैसे इसे किसी की आरज़ू ही नहीं यूं लगता है कि जैसे किसी को मेरी जरूरत ही नहीं न दोस्तों के...
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Friday, 16 November 2012

कसक ....

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यूं तो हूँ मैं तुमसे जन्मी हूँ माँ  मगर तुमने मुझे कभी अपना समझा ही नहीं माँ  क्या सिर्फ इसलिए कि मैं एक लड़की थी  या मेरा रंग ज़रा ...
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Monday, 5 November 2012

सफर ज़िंदगी का ....

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एक लंबी सड़क सी ज़िंदगी  एक ऐसी सड़क  जिसे तलाश है अपनी मंज़िल की  वो सड़क जिसे अपने आप में ऐसा लगता है कि  कभी तो खत्म हो...
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Friday, 5 October 2012

बदलाव

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कभी कहीं पढ़ा था कि बारिश में इन्द्र धनुष के रंग ही तो बरसते है वरना यूं तो सारी धरती रंग हीन ही नज़र आती है सच ही तो है, ज़िंदगी का ...
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Wednesday, 26 September 2012

यादों की इमारत

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यूं तो आज तुमसे मिले बिछड़े कई साल होने को आए  मगर आज भी ऐसा लगता है  जैसे आज की ही बात हो  यूं होने को तो बात तुमसे आज भी होती है, ...
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Friday, 14 September 2012

चाहत

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यूं तो ज़िंदगी ने बहुत कुछ दिया है हमें  इसलिए तो आज सभी ने दिलोजान से चाहा है हमें   यह मेरी ज़िंदगी का दिया हुआ कोई तौहफा ही है जो आज    ...
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Monday, 3 September 2012

प्यार का एक गीत...

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सागर किनारे साहिल की रेत पर  न जाने कितनी बार लिखा मैंने तुम्हारा नाम  मगर हर बार उसे कोई न कोई सगार की लहर आकर मिटा गयी  मगर मैंने हार ना ...
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Wednesday, 22 August 2012

सूर्यास्त और मेरा मन...

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कभी यूं भी होता है कि  अक्सर किसी नदी किनारे शाम के वक्त उस नदी के निर्मल जल में पैरों को डालकर बैठना मुझे बहुत अच्छा लगता है न सिर्फ बैठना...
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Thursday, 12 July 2012

ख़्यालों की दुनियाँ ...

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दिन भर की भागा दौड़ी और किसी न किसी काम में उलझे रहने के कारण  जब रात को थक कर जा लेटता है यह शरीर  तब अक्सर वो मन के जागने का समय होता है ...
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Tuesday, 3 July 2012

क्या है पहचान एक औरत की "सागर या धरती"....?

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कब तक तुम अपनी चाहत का वास्ता दे-देकर अपने प्यार का यह रंग चढ़ाते रहोगे मुझ पर...कब तक ? आखिर क्यूँ, किस लिए दिखाते हो तुम मुझे अपने प्यार ...
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Tuesday, 26 June 2012

ज़रा सोच ओ बंदे ...

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यूं तो ज़िंदगी हर लम्हा, हर पल करवटें बदलती ही रहती है   जिसकी एक करवट कभी रातों का जागरण दे जाती है  तो कभी उस ही ज़िंदगी की दूसरी करवट पर...
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Wednesday, 20 June 2012

उम्मीद...

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सुबह की पहली किरण के मेरे कक्ष में पदार्पण के साथ ही उदय होता है  मेरी उम्मीदों का सूरज भी मेरे मन के किसी कोने में कहीं  उस पर दूर मंदिर स...
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Wednesday, 13 June 2012

इश्क़ बनाम दिमाग का लोचा ...

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कितना कुछ छुपा है न इस एक शब्द में, नहीं ? कहने को नफरत को भी प्यार से जीता जा सकता है इसलिए शायद यह कहावत बनी होगी कि, "प्यार और जंग ...
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Friday, 25 May 2012

चाँद से बातें ....

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मन में बसे समंदर के साहिल की रेत पर जब कुछ बातें कुछ यादें दस्तक दे जाती है तो अक्सर मन उदास हो जाता है और क्यूँ न हो  आखिर उदासी भी तो कभी-...
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Pallavi saxena
मैं भोपाल की रहने वाली हूँ। मैंने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा भोपाल में ही प्राप्त की। भोपाल के नूतन कालेज से बी.ए एवं अँग्रेज़ी साहित्य में एम.ए किया। एक साधारण सी गृहणी, 7 वर्ष लंदन में रहने के बाद 2014 में फिर अपने वतन भारत(पुणे) वापस आई हूँ। हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक श्री मुंशी प्रेमचंद को बहुत पसंद करती हूँ। उनके लेखन की सरल भाषा को ध्यान में रखकर, उनसे प्रेरित होकर ही मैं अपने ब्लॉग की भाषा को भी सरल बनाकर लिखने का प्रयास करती हूँ, ताकि मेरे ब्लॉग को हर आयु, वर्ग का व्यक्ति आसानी से समझ सके। अपने इस ब्‍लॉग में मैं अपने जीवन के अनुभव प्रस्‍तुत कर रही हूँ।
Garbhanal
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