Pasand

Monday, 27 February 2012

क्या इसको ही कहते हैं प्यार ....

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जब भी कभी किसी को प्यार होता है  तब हमेशा ही कोई अनदेखा, अंजाना  सा चेहरा बिन बांधे कोई डोर ऐसे खींचता है अपनी ओर  जैसे जन्मो जन्मांतर का र...
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Tuesday, 21 February 2012

फलसफ़ा ज़िंदगी का

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यूं तो शायद आज आपको मेरी यह रचना पढ़कर  ऐसा लगे जैसे यह तो वही बात हुई "ढ़ाक के तीन पात"  मगर क्या करू यही सच है, समंदर क...
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Thursday, 16 February 2012

इंतज़ार ....

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कभी दोस्ती का दिन,  तो कभी आलिंगन का दिन, तो कभी प्यार के इज़हार का दिन   रोज़ कोई नया दिन आता है और आकर चला भी जाता है  मगर,यदि कोई नहीं आ...
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Monday, 13 February 2012

Happy Valentine's Day Friends....

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फरवरी यानि प्यार का मौसम     गुलाबों की गुलबियत लिए गुलाबी-गुलाबी सा प्यार, लाल-पीले गुलाबों के रंग सा रंगीन प्यार    फूलों की खुशबों से महक...
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Thursday, 9 February 2012

दर्द...

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दिल के ज़ख़्मों से बूंद-बूंद रिस्ता दर्द  जब कभी,जज़्ब होता चला जाता हैं कहीं   जैसे सुखी मिट्टी में पानी  और परत दर परत जमता चला जाता है व...
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Monday, 6 February 2012

मिर्च मसाला ...

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क्या कहूँ लग रहा है आप सब मुझ पर पढ़कर शायद हसेंगे कि यह क्या कुछ भी लिख दिया है। मगर क्या करूँ जो महसूस किया उसे लिखे बिना रह भी नहीं सकती...
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Friday, 3 February 2012

सत्यम शिवम सुंदरम ...

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कहते है प्यार अमर होता है प्यार करने वाले खुद मिट जाते है मगर उनका प्यार कभी नहीं मिटता हो सकता है यही सच भी हो वरना क्यूँ जपते लोग नाम...
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Wednesday, 1 February 2012

क्या यही प्यार है

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कभी सोचा है कि एक सितारों भरी रात से कहीं ज्यादा रोशनी होती है एक चाँदनी रात में क्यूँ हजारों की भीड़ में से केवल एक चेहरा उतर जाता है ...
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Friday, 27 January 2012

दुआ ना मांगते लोग ....

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देखा है कभी खुद के नज़रिये से आसमान को  देखने में एक सुंदर नारी के काले दुपट्टे में टंके   सितारों सी रात जिसके चेहरे पर लगी है चंद्र बिंदी ...
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Wednesday, 25 January 2012

अस्तित्व ज़िंदगी का ....

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ज़िंदगी एक रूप अनेक  बचपन के रंगों से सजी झरने सी ज़िंदगी  जवानी के रंग लिए नदिया सी मदमाती ज़िंदगी तो कभी सागर की तरह ठेहराव लिए शांत सी ज...
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Saturday, 21 January 2012

जीवन रूपी अग्नि ...

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गीली मिट्टी के बर्तन सी ज़िंदगी जैसे हो हमारा बचपन जिसे कुम्हार अपने हाथों से  सहेज कर बनाता है एक घड़ा और एक सुराही   दोनों को ही डाल दे...
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Thursday, 19 January 2012

वक्त साथ दे तो कुछ बात बने ....

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 बहुत देर तक चाँद को देखा है कभी ऐसा लगता है जैसे एक सफ़ेद चीनी की प्लेट हो और उस  सफ़ेद चाँद की प्लेट  पर ऊपर खड़े  होकर ऊपर से    जब देख...
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Monday, 16 January 2012

किताब ज़िंदगी की ...

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ज़िंदगी की किताब में  एहसासों के पन्ने होते है   जिन पन्नो पर कभी लिखी  होती है मन की अभिव्यक्ति तो कभी कुछ कहे अनकहे से जज़्बात  खुद से ही...
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Friday, 13 January 2012

क्या तुम्हें याद है ...

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दिल जब भी उदास होता है   क्यूँ अक्सर यही होता है  पीछे वजह होती है तेरे भूल जाने की  क्यूँ तुझे कुछ नहीं याद होता है क्यूँ हर चीज़ याद रह ज...
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Thursday, 12 January 2012

ज़िंदगी के कुछ (सुहाने पल)...

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यूँ तो ज़िंदगी में हर मोड़ पर  सुख दुःख आते जाते ही रहते है  जैसे सर्दियों का सर्द मौसम अक्सर  लोगों को उदास बना जाता है क्योंकि घर के ब...
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Monday, 9 January 2012

भावनायें....

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लिखने जाती हूँ जब  कोरे कागज़ पर अपने  जज़्बात तो ऐसा लगता है  जैसी सियाही के रूप में  मन की अभिव्यक्ति पिघल-पिघल  कर बह रही हो भावनाओं में ...
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Friday, 6 January 2012

आखिर क्या है यह ज़िंदगी....

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समंदर में उठती लहरें  जैसी पानी सी बहती हुई ज़िंदगी  ऊँची-नीची लहरों सी  पल-पल बदलती ज़िंदगी  समंदर के पानी की तरह  कभी गहरी, तो कभी, उथली ...
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Wednesday, 4 January 2012

यादों में भीगा मन

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सागर किनारे एकांत में  अकेले बैठकर कभी सोचा है  मन रूपी समंदर के तट पर आती  हुई यादों की हर लहर  छूकर गुज़र जाती है  मन को, जैसे साहिल को छू...
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Friday, 30 December 2011

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें....

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वक्त का पहिया न रुका है कभी  न रुकेगा कभी किसी के लिए  हर साल एक नया साल आता है  तो एक पुराना साल जाता है  यह आना जाना  बस यूं हीं चलता-चला ...
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Wednesday, 28 December 2011

पहले प्यार का एहसास

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पहले प्यार का वो पहला  सागर नुमा  गहरा एहसास  सागर की बाहों में मचलती लहरें  प्रेमियों के मन में मचलती  हुई भावनायें हो जैसे,  साहिल को छून...
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Pallavi saxena
मैं भोपाल की रहने वाली हूँ। मैंने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा भोपाल में ही प्राप्त की। भोपाल के नूतन कालेज से बी.ए एवं अँग्रेज़ी साहित्य में एम.ए किया। एक साधारण सी गृहणी, 7 वर्ष लंदन में रहने के बाद 2014 में फिर अपने वतन भारत(पुणे) वापस आई हूँ। हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक श्री मुंशी प्रेमचंद को बहुत पसंद करती हूँ। उनके लेखन की सरल भाषा को ध्यान में रखकर, उनसे प्रेरित होकर ही मैं अपने ब्लॉग की भाषा को भी सरल बनाकर लिखने का प्रयास करती हूँ, ताकि मेरे ब्लॉग को हर आयु, वर्ग का व्यक्ति आसानी से समझ सके। अपने इस ब्‍लॉग में मैं अपने जीवन के अनुभव प्रस्‍तुत कर रही हूँ।
Garbhanal
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