Pasand

Wednesday, 9 November 2022

~भागती ज़िंदगी में कुछ छूटते रिश्ते तो कभी टूटते रिश्ते ~

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बेशक बदलते वक़्त के साथ खुद को बदलते हम  समय की कदम ताल से, ताल मिलाते हम  इस अनचाही सी कोशिश में, खुद को झोंकते हम  इस वक़्त की आपाधापी में, ...
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Saturday, 17 April 2021

~पता ही नहीं चला ~

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अटकन चटकन का ले काफ़िला, कब आगे हम चल निकले थे  कब भटकन की राह पर बढ़ गए  पता ही नहीं चला ... कुछ साथ है, कुछ साथ थे, कुछ दोस्त पुराने कब पीछे...
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Tuesday, 23 February 2021

माँ प्रकृति का प्रसाद

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कभी- कभी कुछ तस्वीरें ले तो ली जाती हैं खेल-खेल में  लेकिन बाद में उन्हें देखने पर बहुत कुछ समझ में आता है  जैसे कि यह तस्वीर,  इस तस्वीर ...
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Wednesday, 22 July 2020

हम तुमको ना भूल पाये हैं ~

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बहुत उदास शामें है इन दिनों मायूसियों के साये है फिर भी हम तुम को ना भूल पाए है है फ़िज़ा इन दिनों कुछ ज्यादा ही ग़मगीन के हो रहा है...
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Thursday, 16 July 2020

~चिराग~

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चंद उदास शामें है और चंद स्याह रातें चारों ओर एक अजीब सी खामोशी पसरी है न पंछियो का कोई शोर है ना पार्क में खेल रहे बच्चों की को...
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Tuesday, 23 June 2020

~आखिर क्यों ~?

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कुछ भी तो नहीं बदला प्रिय   हर रोज़ सूरज यूं ही निकलता है शाम यूं ही ढलती है हवाएँ भी रोज़ इसी तरह तो चलती है, जैसे अभी चल रही है प...
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Saturday, 30 May 2020

~अधूरापन~

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तप्ती गरमी और कड़ाके की ठंड को सहती हुई यह वादियाँ ना जाने कितनी सदियों से प्रतीक्षा कर रही है उस आसमान के एक आलिंग कि, की जिसे पाकर म...
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Monday, 25 May 2020

~प्यार ~

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क्या कहूँ तुम से कि नि शब्द हूँ मैं आज तुम्हारी बातें, जैसा मेरा श्रृंगार सुनते ही मानो....मानो मेरे मन मंदिर में जैसे, बज उठते हैं हजार...
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Friday, 22 May 2020

~तुम ~

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इतनी सुंदर तो न थी मैं, जितना आज तुमने मुझे बना दिया कुछ यूं घुमाया शब्दों को, मानो एक दीपक जला दिया गुज़र हुये दिन कुछ इस तरह याद आए ...
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Thursday, 13 February 2020

★~मुहोब्बत आसान नही होती~★

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आज वैलेंटाइन डे है। अर्थात प्यार का दिन, प्यार करने वालों का दिन, लेकिन क्या प्यार का भी कोई दिन होना चाहिए ? आप अपने साथी से कितना प्यार क...
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Saturday, 11 January 2020

सच और झूठ का महत्व

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सच सच ही होता है और झूठ झूठ ही होता है फिर कहा जाता है किसी की भलाई के लिए बोला गया झूठ सच से बढ़कर होता है। लेकिन विडंबना देखिये कि फिर...
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Tuesday, 7 January 2020

जानेमन तुम कमाल करती हो।

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जाने मन तुम कमाल करती हो... उठते ही सुबह से सबका ख्याल करती हो बच्चों को स्कूल भेज खुद काम पे निकलती हो सारा दिन खट के जब घर में कदम र...
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Friday, 14 April 2017

बेवकूफ औरतें

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सही में औरतें बहुत ही बेवकूफ होती है हजारों ताने उल्हाने, मार पीट सहकर भी उम्मीद का दामन जो नहीं छोड़ पाती यह औरतें न जाने कितनी बार टू...
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Monday, 10 April 2017

ज़िंदगी ~

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गुज़र रही है ज़िंदगी कुछ इस तरह कि जैसे इसे किसी की कोई चाहत ही नहीं कभी दिल है तो कभी दिमाग है ज़िंदगी  कभी एक नदिया तो कभी एक किताब है ...
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Saturday, 23 July 2016

बहती हवा सी ज़िंदगी ~

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कभी रुकती संभलती, कभी ज़रा सी ठहरती  तो कभी डूबती उबरती  कुछ यूं ही हवा सी बह रही है ज़िंदगी  न समय का पता है, न मंज़िल की क...
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Monday, 30 November 2015

स्त्री ...

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इस अभिव्यक्ति की जान अंतिम पंक्तियाँ मेरी नहीं है मैंने उन्हें कहीं पढ़ा था। कहाँ अब यह भी मुझे याद नहीं है। कृपया इस बात को अन्यथा न ले...
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Monday, 2 November 2015

खामोशी के चंद आँसू

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कैसे अजीब होते है वो पल, जब एक इंसान खुद को इतना मजबूर पाता है  कि खुल के रो भी नहीं पाता।   तब, जब अंधेरी रात में बिस्तर पर पड़े...
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Wednesday, 27 August 2014

माँ के मन की व्यथा...

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वर्तमान हालातों को मद्दे नज़र रखते हुए जब मैंने मेरी ही एक सहेली से फोन पर बात की और तब जब उसने यह कहा कि यार चिंता और फिक्र क्य...
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Saturday, 22 February 2014

प्रेम

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प्रेम क्या है ! इस बात का शायद किसी के पास कोई जवाब नहीं है। क्योंकि प्रेम की कोई निश्चित परिभाषा भी तो नहीं है। प्रकृति के कण–कण में प्रे...
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Wednesday, 29 January 2014

बस यूँ ही...

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अजीब दास्‍तान है ये कहां शुरू कहां खत्म ये मंज़िलें हैं कौन सी न वो समझ सके न हम.... सच ज़िंदगी भी तो ऐसी ही है। ठीक इसी गीत की पंक्त...
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Pallavi saxena
मैं भोपाल की रहने वाली हूँ। मैंने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा भोपाल में ही प्राप्त की। भोपाल के नूतन कालेज से बी.ए एवं अँग्रेज़ी साहित्य में एम.ए किया। एक साधारण सी गृहणी, 7 वर्ष लंदन में रहने के बाद 2014 में फिर अपने वतन भारत(पुणे) वापस आई हूँ। हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक श्री मुंशी प्रेमचंद को बहुत पसंद करती हूँ। उनके लेखन की सरल भाषा को ध्यान में रखकर, उनसे प्रेरित होकर ही मैं अपने ब्लॉग की भाषा को भी सरल बनाकर लिखने का प्रयास करती हूँ, ताकि मेरे ब्लॉग को हर आयु, वर्ग का व्यक्ति आसानी से समझ सके। अपने इस ब्‍लॉग में मैं अपने जीवन के अनुभव प्रस्‍तुत कर रही हूँ।
Garbhanal
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