Thursday, 19 January 2012

वक्त साथ दे तो कुछ बात बने ....

 बहुत देर तक चाँद को देखा है कभी
ऐसा लगता है जैसे एक सफ़ेद
चीनी की प्लेट हो और उस 
सफ़ेद चाँद की प्लेट 
पर ऊपर खड़े 
होकर ऊपर से   
जब देखा मैंनेधरती को 
तो मुझे ऐसा लगा वो चाँद 
जिस पर हम खड़े है
वह हमारा वर्तमान है 
और वो जो दूर कहीं नीला 
सा एक बिन्दु नज़र आरहा है 
वह है हमारा अपना अतीत 
बहुत ध्यान से नज़रें गाड़ा कर 
देखा तो ऐसा लगा 
जैसे मन खो गया है 
उस अतीत की गहराइयों में कहीं 
जब उस अतीत की ऊंची नीची पहाड़ियों 
नदियों और झरनो की तरह 
पानी बन बह रहे जज़्बातों को देखा 
तो उस पानी में 
प्यार के सच्चे मोती के 
कुछ कण से मिले
जो समय के बहाव के कारण 
शायद मेरे हाथों से 
फिसल कर वहीं गिर गए थे
मगर शायद हमारी भावनाओं के 
समंदर ने उन प्यार के कणों की रक्षा की
तभी वक्त का दरिया भी उन्हे 
अपने साथ बहाकर ना लेजा सका
शायद इसलिए
आज इतने बरसों बाद भी मुझे मिले 
मेरे सच्चे प्यार के कुछ बिखरे हुए से कण
जिन्हें देखकर एक बार फिर
मेरे दिल से आवाज आई की 
प्यार तब भी था, प्यार अब अभी है
क्यूंकि यह वक्त ही है 
जिसने हमें जुदा किया था 
और आज भी यह वक्त ही है 
जिसने यह एहसास जगाया 
प्यार कभी नहीं मिटता 
और आज भी यह वक्त ही है     
जो हमें फिर मिलाएगा  
तो अब 
अगर वक्त साथ दे तो कुछ बात बने....

21 comments:

  1. nice lines, improving day by day

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  2. बहूत सुन्दर और सारगर्भित अभिव्यक्ति...वक़्त के सब हैं गुलाम, वक़्त का हर शह पे राज...

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  3. वाह रे चाँद..... तुझ से क्यों हो जाता है प्यार, तुझ में क्यों दीखता है प्यार...:)
    बेहतरीन रचना...!!!!!

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  4. बहुत सुन्दर ख्याल

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  5. bahut bhaavpoorn abhivyakti.umda khayaal.

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  6. Lajavab kavita...Pallavi ji,apne pyar ko ek naye rang me prastut kiya...prakriti ke sath bhavnaon ka samanjasya..behatareen.
    Hemant

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  7. पल्लवी जी नमस्ते बहुत ही सुन्दर कविता बधाई और शुभकामनाएँ |

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  8. बहुत बढ़िया रचना रची है आपने । बधाई । इसी तरह लिखती रहें ।
    आभार ।

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  9. प्रेमभाव को तीनों कालों से बाँधती रचना. बहुत सुंदर.

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  10. //प्यार के सच्चे मोती के
    कुछ कण से मिले
    जो समय के बहाव के कारण
    शायद मेरे हाथों से
    फिसल कर वहीं गिर गए थे..

    bahut sundar rachna pallavi ji.. chaand to humesha se hi shrangaar ka gehnaa raha hai.. bahut hi achha likha hai .. :)

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  12. Bahut sundar likha hai aapne :)

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  13. सुंदर ................बधाई स्वीकारें

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  15. This comment has been removed by a blog administrator.

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  16. सुंदर ................बधाई स्वीकारें

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  17. kalpnaon ka daaman chhod kar vigyan ki dhra par aajaiya jhan chand ab aek anya bhasha men pribhashit hae . vaese aapki kavita behad pyaari hae .

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  18. गहरे भाव लिए सुन्दर रचना !
    आभार !

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