Thursday, 8 December 2011

बेबफ़ाई


आज तक प्यार में मरने वालों 
के बारे में तो बहुत 
सुना होगा ना तुमने  
मगर क्या 
कभी यह सुना है 
कि किसी को इतना प्यार 
मिला कि 
प्यार पाकर ही वो पल-पल मर 
रहा हो,नहीं ना,
लेकिन सच यही है,  
कैसे कहूँ तुम से 
कि मैं तुम्हारे इस असीम 
और बेपनाह  
प्यार के काबिल नहीं, 
मैं तो वो बेवफ़ा हूँ 
जिसे भावनाओं के 
एक झोंके ने
झोंक दिया हमेशा के लिए 
पश्चयताप कि 
उस कभी न बुझने वाली आग में, 
जहां तुम्हारे प्यार का बेपनाह 
समंदर होते हुए भी, 
सूखा पड़ा हुआ है, मेरा अस्तित्व,  
जहां तुम्हारा सच्चा प्रेम  
कचोटता है, 
मेरे वजूद को, 
जिसके चलते न मैं मर ही सकती हूँ 
और न हीं मैं जी सकती हूँ 
जैसे खाई हुई 
मछ्ली का कांटा 
जो न निगलते बनता है 
और 
न उगलते... 

12 comments:

  1. Prem ko lekar likhi gayi bahut achchhi kavita..itane sahaj aur saral shabdon me dil ki bhavnaon ko abhivyakt karna kabile tarif hai...
    HemantKumar

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  2. मनोभाव को भली प्रकार से व्यक्त करती कविता. अच्छी रचना.

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  3. very nice....pyaar me jajbato ko bhut hi sunderta se shabd diya hai aapne....nice:)

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  4. कैसे कहूँ तुम से
    कि मैं तुम्हारे इस असीम
    और बेपनाह
    प्यार के काबिल नहीं,
    मैं तो वो बेवफ़ा हूँ
    जिसे भावनाओं के
    एक झोंके ने
    झोंक दिया हमेशा के लिए
    पश्चयताप कि
    उस कभी न बुझने वाली आग में

    दिल को अंदर तक छू गयी यह कविता।

    सादर

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    From Great talent

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  6. जहां तुम्हारा सच्चा प्रेम
    कचोटता है,
    मेरे वजूद को,
    जिसके चलते न मैं मर ही सकती हूँ
    और न हीं मैं जी सकती हूँ

    ....प्रेम के अंतर्द्वंद की भावपूर्ण अभिव्यक्ति...रचना के भाव अंतस को गहराई तक छू जाते हैं..बहुत सुंदर

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  7. mahendra singh parihar9 December 2011 at 09:05

    दिल को छू गयी यह कविता

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  8. कविता के इस नए क्षेत्र में होंसला अफ़ज़ाई के लिए आप सभी पाठकों एवं मित्रों का तहे दिल से शुक्रिया। कृपया यूं हीं संपर्क बनाये रखें...आभार

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  9. जैसे खाई हुई
    मछ्ली का कांटा
    जो न निगलते बनता है
    और
    न उगलते... बहुत सुंदर !

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  10. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।
    मेरा शौक
    मेरे पोस्ट में आपका इंतजार है
    आज रिश्ता सब का पैसे से

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  11. ओह कविता लिखने की शुरुआत आपने की और ऐसी ऐसी बातों से...मैंने तो समझा था की मासूम,प्यारी और हलकी फुलकी कविता से शुरुआत करेंगी...
    लेकिन जो भी है अच्छा लगा :)

    और वैसे ये वर्ड वेरिफिकेसन वाला हटा दीजिए..

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