Wednesday, 4 December 2013

सर्द हवाओं में ठिठुरते एहसास....और तुम


सर्द हवाओं में ठिठुरते एहसास और तुम 
इन दिनों बहुत सर्दी है यहाँ,  
एकदम गलन वाली ठंड के जैसी ठंड पड़ रही है
जिसमें कुछ नहीं बचता
सब गल के पानी हो जाना चाहता है
जैसे रेगिस्तान में रेत के तले सब सूख जाता है ना 
बिलकुल वैसे ही यहाँ की ठंड में भी कुछ नहीं बचता  
यहाँ तक के खुद का वजूद भी नहीं,अस्तित्व हीन सी लगने लगती है ज़िंदगी 
जिसकी न कोई राह है, न मंज़िल, फिर भी बस चले जा रही है 
किसी बर्फ की चट्टान के जैसी ज़िंदगी, जो कतरा-कतरा पिघल रही है 
ऐसे में जब कभी घर के बाहर निकलना होता है 
तब जैसे इन सर्द हवाओं में मेरे सारे एहसास ठिठुर जाते है 
सारे जज़्बात सिकुड़ जाते है  
और फिर जब मौसम की ठंडक 
धीरे-धीरे किसी बुझते हुए दिये की कप कपाती लौ की भांति 
मेरे दिमाग को सुन्न करना आरम्भ करती है 
तब मैं भी चुपके से जला लेती हूँ अपने अंदर तुम्हारे नाम की एक सिगड़ी
और डाल देती हूँ उसमें कोयला नुमा जलती हुई कुछ यादें,वादे, मुलाकातें 
तब उन यादों,वादों और मुलाकातों की गरमी पाकर 
फिर जी उठते है मेरे अंदर के कुछ मरे हुए एहसास मेरे जज़्बात....और तुम 

24 comments:

  1. तुम्हारे नाम की सिगड़ी और यादों के कोयले ... शायद इस बार की सर्दी आसांन हो जाए ...
    लाजवाब बिम्ब और गज़ब के भाव ...

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  2. बहुत खूबसूरत ....!!

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  3. उस एक नाम की गर्माहट बनी रहे ... सस्नेह !

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  4. यादों के प्रतिमान इतने मजबूत होते हैं कि उसमें मौसम की मार से निरर्थक अनुभव होता व्‍यक्तित्‍व भी नया, सुन्‍दर बन जाता है। मेरे दिमाग को सुन्‍न करना आरम्‍भ करती है, वाक्‍य में (सुन्‍न्‍) (आरम्‍भ) ठीक कर लें।

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  5. यादों कि गर्मी .......... बहुत बढ़िया |

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  6. ,बेहतरीन अभिव्यक्ति...!
    ----------------------------------
    Recent post -: वोट से पहले .

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  7. yun to kavita padhate padhte thandhak lagane lagi ......bahut hi sajeev varan apne thandhak ki ki hai ......bs aakhiri pnkti tk pahuchate pahuchate paseene aane shuru ho gaye .........vakai bahut hi sundar abhivykti ke sath lajbab rachana prastut kiya .....aabhar Pallvi ji .

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  8. बहुत ही सुन्दर रचना...

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  9. Bahut hee gahara bhaav chupa hai is rachana me.....Abhi Hindi ke saare alankar / ras ki definition bhool chukaa hoon..shayad ye Shringar ras ki kavita hai...

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  10. बहुत खूबसूरती से ठिठुरते एहसासो का जिक्र किया है..आपने पल्लवी जी..फिर वो तुम्हारे नाम की सिगड़ी कुछ गर्माहट देती है..बेहतरीन रचना..

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  11. ........ ठिठुरते एहसास.... सुंदर प्रस्तुतिकरण...बहुत ही बेहतरीन

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  12. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति.

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  13. स्मृतियाँ और भाव ऊर्जा देते हैं। सुन्दर कविता।

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (07-12-2013) "याद आती है माँ" “चर्चामंच : चर्चा अंक - 1454” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  15. कितनी यादें...कितने ही वादे ,कुछ पूरे,कुछ अधूरे......ढेरों मुलाकातें....
    उसे शायद पता था तुम सर्दियाँ सह नहीं पातीं.........

    अनु

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  16. .......तुम्हारी नाम की सिगड़ी ............
    बहुत सुन्दर रचना !
    नई पोस्ट नेता चरित्रं
    नई पोस्ट अनुभूति

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  17. ऐसी यादों से जीवन के तमाम दुश्वारियों में भी हौसला मिलता रहता है. सुन्दर रचना.

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  18. यादों की ऊर्जा काफी होती है एक जडता को हटाने के लिये । अच्छी रचना ।

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  19. बहुत उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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