Sunday, 20 January 2013

लो बीत गया फिर, एक और साल ....

लो हर बार की तरह बीत गया एक और साल,
फिर एक बार आया है नया साल 
मगर 
कुछ भी तो नहीं बदला मेरी ज़िंदगी में, नया जैसा तो कुछ हुआ ही नहीं कभी,
यूं लगता है जैसे 
बस एक वही साल आकर ठहर सा गया है, मेरी ज़िंदगी में कहीं
कि जिसमें हम मिले थे कभी
तब से अटकी हूँ मैं बस उसी एक साल में, पता है क्यूँ ?
क्यूंकि उस एक साल में ही कुदरत ने जैसे मुझे
ज़िंदगी के सारे मौसम एक साथ ही दे दिये थे, ताउम्र गुज़ारने के लिए,
लेकिन देखो न, केवल पतझड़ को छोड़कर
मेरा साथ किसी मौसम ने दिया ही नहीं कि आज भी
हम राही बन साथ है वो मेरे,
साथी मेरे 
प्यार का भी क्या कमाल मौसम होता है न,
कि गुलाब ही नहीं, बल्कि जंगली फूल तक खूबसूरत नज़र आने लगते है
अधरों पर नित नये गीत स्वतः ही सजने लगते है
ज़िंदगी इतनी खूबसूरत सी नज़र आती है कि जैसे 'जन्नत' अगर कहीं है
तो बस वह यहीं है 
मगर किसे पता होता है कि ज़िंदगी के यह चार पल 
किसी जादुई फरेब से कम नहीं होते 
जैसे किसी जादूगर ने अपने जादू से एक खूबसूरत दुनिया का निर्माण किया  
और हकीकत से सामना होते ही जैसे प्यार का सारा जादू छू सा हो जाता है
और हम अचानक ही आ गिरते हैं हकीकत के धरातल पर
जैसे मुझ संग तुम्हारा प्यार
और बस गुनगुनाते रह जाते यह गीत के
प्यार के लिए, चार पल कम नहीं थे, कभी तुम नहीं थे कभी हम नहीं थे .....:)
     

16 comments:

  1. शुभकामनाएं, बढिया जज्बात हैं।

    ReplyDelete
  2. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि को कल दिनांक 21-01-2013 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    ReplyDelete
  3. वाह !!!!!!!!!!!सुंदर रचना. इसे पढ़कर गज़ल याद आ गई....

    दुनियाँ जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है
    मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है

    ReplyDelete
  4. सुंदर अभिव्यक्ति के साथ सुंदर सब्द संयोजन .............बधाई

    ReplyDelete
  5. बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति।।
    :-)

    ReplyDelete
  6. बढ़िया लिखा है . जीवन के हर वर्ष ऐसे ही बितते जाते है .

    ReplyDelete
  7. जिन्दगी के अनेक रंग ..... बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  8. दिल को छूने वाली रचना !!

    ReplyDelete
  9. प्यार के लिए चार पल कमनहीं थे , कभी तुम नहीं थे कभी हम नहीं थे ..
    बहुत खुबसूरत संवेदना दिल के करीब ......

    ReplyDelete
  10. सार्थक और उपयोगी लेखा-जोखा की प्रस्तुति!

    ReplyDelete
  11. बीत जाते हैं साल दर साल
    पर कुछ नहीं बदलता
    प्यार करने को शायद
    चार पल का वक़्त नहीं मिलता ।

    सुंदर अनुभूति ।

    ReplyDelete
  12. गहरे जज्बातों को कलम देदी ...
    प्रेम को जीने के लिए वैसे तो कुछ पल ही बहुत हैं ... पर अगर चार कदम पूरे भी मिलें तो भी कम हैं ...

    ReplyDelete
  13. सार्थक अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  14. :) :) और ये मेरे फेवरिट गानों में से है "प्यार के लिए चार पल कम नहीं थे..."

    ReplyDelete